।जय भोले।
हे प्रलयंकर हे अभ्यंकर नीलकण्ठ,
हे चैतन्य चेतना के स्वर शितिकण्ठ।
शिवशंकर शांत तू शिवात्मनां शिव,
आशुतोष-हर-रूद्र-शंकर सदाशिव।।
मोह-तम-हरण प्रभु लावण्य- धाम,
शिव शोक- हर्ता प्रभु लोकाभिराम!
संतत - हृदय नित बसत मेरे शंकरा,
अविचल अरूप अनामय अगोचरा।।
डमरूधर कैलाशपति हे सुखरासी,
हे गंगाधर हे करुणाकर अविनाशी।
हे प्रेमागर हे सुखसार प्रभु-त्रिपुरारी,
जय- सगुण-अनामय जय-मदहारी।।
हे ईश् गिरीश सर्वेश महेश भगवंता,
हे महादेव प्रभु गौरीशंकर उमाकंता।
अखंड अनंत महादेव परेश महेश्वरा,
जय विश्वनाथ देव सर्वेश्वर भूतेश्वरा।।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें