मेरे शब्द ही मेरी पहचान का गीत बने,
मेरा व्यवहार ही जमाने में प्रतिबिंब बने।
शब्दों में भाव की अभिव्यक्ति विशिष्ट,
काव्य- रस छंदो में सार्थक कर्तव्यनिष्ठ।।
निज अस्तित्व आव्हान धवल- चरित्र,
व्यक्तित्व विस्तार द्रवित संवेदना पवित्र।
कागज पर अंकित गहन भाव चित्रित,
संयमित जीवन प्रखर स्वर अभिमंत्रित।।
सत्य - पथ के बटोही प्रबुद्ध पहचान,
नवचेतना में नवल युग का नव निर्माण।
राह- अनगिनत विरचित शिल्पकार,
भेदता गगन लक्ष श्रम-बिंदु अविष्कार।।
मूल- स्वभाव मानवी- मन का प्राण,
चित्त का अवधान करे प्रकट पहचान।
मन की फकीरी में गढ़े देव प्रतिमान,
अस्मिता सर्जन संकल्पित उदीयमान।।
शांत -प्रवाह न कोई उन्मुक्त उन्माद,
हिय धड़कन में स्वर-व्यंजन अनुवाद।
औदार्य संचित सौंदर्य सार देव गीत,
क्षणिक पहचान पल लिख अमरगीत।।

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