बुधवार, 31 मार्च 2021

जब भी टूटना हो अकेले में टूटना,

जब भी टूटना हो अकेले में टूटना,
जब तक साँसे है कोई कंधा नहीं देता।
तमाशाबीन है ये कमबख्त दुनियां,
थके हुए बदन को है बदनाम कर देता।।
मैं भी एक मुसाफिर इस जमाने में,
गाँव-गली शहर से गुजरता चला गया।
सराये में जब भी की कोशिश मैंने,
अक्सर कोई वहाँ..बहाना किया गया।।
दरवाजे पर...दिल की दस्तक हुई,
जाकर देखा तो साँसों का झोंका था।
यही आखिर सच है.....जमाने का,
दिल ने ही कई बार....मुझे टोका था।।
जिंदगी के अंजुमन...का दस्तूर है,
जीने का सलीका....सिखाते जा रही।
आवाज है.....रुहानियत की सुनो,
देव जो हर सुबह वक़्त पर जगा रही।।
✍🏻 देवेन्द्र हिरवानी
कन्हारपुरी वार्ड नं 34
राजनांदगांव(छ.ग.) 









।जय भोले।

             ।जय भोले।

हे प्रलयंकर हे अभ्यंकर नीलकण्ठ,
हे चैतन्य चेतना के स्वर शितिकण्ठ।
शिवशंकर शांत तू शिवात्मनां शिव,
आशुतोष-हर-रूद्र-शंकर सदाशिव।।
मोह-तम-हरण प्रभु लावण्य- धाम,
शिव शोक- हर्ता प्रभु लोकाभिराम!
संतत - हृदय नित बसत मेरे शंकरा,
अविचल अरूप अनामय अगोचरा।।
डमरूधर कैलाशपति हे सुखरासी,
हे गंगाधर हे करुणाकर अविनाशी।
हे प्रेमागर हे सुखसार प्रभु-त्रिपुरारी,
जय- सगुण-अनामय जय-मदहारी।।
हे ईश् गिरीश सर्वेश महेश भगवंता,
हे महादेव प्रभु गौरीशंकर उमाकंता।
अखंड अनंत महादेव परेश महेश्वरा,
जय विश्वनाथ देव सर्वेश्वर भूतेश्वरा।।
देवेन्द्र हिरवानी
कन्हारपुरी वार्ड नं 34
राजनांदगांव(छ.ग.)